अनूप जलोटा और जसलीन से समाज असहज क्यों हो जाता है?

(राजीव चौधरी )

प्यार को देखने का सबका अपना अलग-अलग नज़रिया होता है, धर्म का अपना अलग नज़रिया है, तो समाज का अलग। खुद के प्रेम में महानता दिखाई देती है तो दूसरे के प्रेम में वासना। इस विषय में प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास की एक कविता की मशहूर पंक्ति भी है, “अभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का, मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा”।

इस वक्त कुछ ऐसा ही भजन सम्राट अनूप जलोटा साहब भी सोच रहे होंगे क्योंकि उनके प्रेम का मज़ाक जो उड़ाया जा रहा है। उनकी उम्र ज़्यादा है और उनकी प्रेमिका जसलीन मथारू की कम। कहा जा रहा है कि दोनों की उम्र में 37 साल का फर्क है और प्रेमिका उनकी बेटी की उम्र की है।

इस मज़ाक के बीच कई लोगों की बातों में दुख भी दिखाई दे रहा है, जैसे वो ही जसलीन के असली हकदार थे और जलोटा साहब बाज़ी मारकर उसे ले गए हों। कुछ लोगों ने लिखा है कि दुनिया में कुछ नहीं रखा, जो कुछ भी है वो भजन गाने में रखा है यकीन हो तो अनूप जलोटा को देख लो।

एक ने लिखा है कि हमें धर्म में अटका कर खुद कर्म से लिपट गए जलोटा जी। मतलब अनूप जलोटा और जसलीन के ऊपर सोशल मीडिया पर ढेरों मीम्स बन गये हैं। लोग यहां तक लिख रहे हैं कि दोनों की फोटो देखो यार वाकई में प्यार अंधा होता है।

क्या इसे मज़ाक तक सीमित समझें? शायद नहीं। कहीं इसमें ईर्ष्या के वही भाव तो नहीं दिखाई दे रहे हैं जो अधिकांश लोगों के मन में किसी सांवले लड़के के साथ किसी गोरी लड़की को देखकर आती है और वो कहते हैं, “देखो लंगूर में मुंह में अंगूर”।

यह सिर्फ हास्य व्यंग तक सीमित नहीं है बल्कि ईर्ष्या का एक अनकहा भाव है जो मन में उठता है कि ये इसके साथ क्यों, मेरे साथ क्यों नहीं है?

जब मैं दसवीं क्लास में था तो हम कई लोग स्कूल के बाहर एक पुलिया पर बैठे थे। तभी स्कूटर पर सवार एक आदमी अपनी पत्नी के साथ गुज़रा। आदमी के मुकाबले पीछे बैठी महिला ज़्यादा सुंदर थी। जब वो पास से गुज़रे तो एक लड़के ने ज़ोर से कहा, “अरे वो देखो कौंआ जलेबी ले गया”। आखिर ये जुमले भी तो किसी ने ज़रूर गढ़े ही होंगे या फिर ये ईर्ष्या प्रकट करने का एक व्यंगात्मक भाव है?

पिछले साल भी कुछ ऐसा ही हुआ था जब बॉलीवुड अभिनेता मिलिंद सोमन को उनसे 34 साल छोटी गर्लफ्रेंड को लेकर काफी ट्रोल किया गया था। तब भी कई लोगों ने लिखा था कि मैं मिलिंद के बारे में जानकर काफी प्रभावित हूं, इसके बाद से मैं भी अब अपनी गर्लफ्रेंड के किसी भी घड़ी पैदा होने का इंतज़ार कर रहा हूं। इससे पहले कॉंग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और उनकी कम उम्र पत्नी अमृता के बारे में भी ऐसी ही बातें सुनने को मिली थीं।

असल में यह सब प्रेम से समझा जा सकता है कि किसी एक रिश्ते की शुरुआत तब होती है जब दो लोग एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं। वो भावनात्मक रूप से एक दूसरे से अटैच हो जाते हैं, साथ रहने लगते हैं। यह कोई फॉर्मूला नहीं है कि सब पर फिट हो, ये सिर्फ लगाव होता है जो उम्र या सुन्दरता नहीं देखता यह एक दूसरे के प्रति समर्पण या अपेक्षा या फिर आसक्ति का भाव देखता है।

पिछले दिनों प्रियंका चोपड़ा ने अपने से 10 साल छोटे निक जोनस से सगाई की तब भी काफी बात बनी थी और लोगों की नज़र सगाई से ज़्यादा उनकी उम्र पर थी, मगर लगाव या प्रेम कब उम्र का लिहाज़ करता है। महाभारत में ही उल्लेख मिलता है कि जब भीष्म युवा थे तब उनके पिता महाराज शांतनु ने सत्यवती से विवाह रचाया था जो उनसे आयु में बहुत छोटी थीं। तब सोशल मीडिया नहीं था वरना शायद तब भी ऐसे ही मज़ाक उड़ाए जाते।

यद्यपि आप शादी के विज्ञापन पढ़ लें या वैवाहिक वेबसाइटों पर चले जाएं, लड़का खुद से कम उम्र की लड़की की डिमांड रखता है। या फिर अपने भारतीय समाज में कितने लोग ऐसे हैं जो अपने से बड़ी उम्र की लड़की से विवाह करते हैं? शायद हमारे भारतीय समाज में तो कोई विरला ही ऐसा होगा जो अपने से पांच या दस वर्ष बड़ी लड़की से शादी के लिए तैयार हो जाये।

बल्कि मैं तो लड़के के परिवार में यहां तक भी सुनता हूं कि हमने रिश्ते को इस वजह से मना कर दिया कि लड़की की उम्र हमारे लड़के से ज़्यादा थी, क्या फायदा 5 साल में वो लड़के की मां सी दिखाई देगी। कितने परिवार ऐसे हैं जो ये कहते हैं कि लड़की उम्र में हमारे लड़के से 10 वर्ष छोटी थी इसलिए हमने रिश्ते को मना कर दिया, क्या फायदा हमारा लड़का कुछ साल बाद उसका बाप सा दिखाई देगा?

आज लोग अनूप जलोटा के इस रिश्ते का मज़ा ले रहे हैं, पर दिल पर हाथ रखकर कितने लोग बता सकते हैं कि वह अपने से छोटी युवा लड़की को देखकर उसके प्रति बहन या बेटी का भाव रखते हैं? या कितनी महिला ऐसी हैं जो अपने से छोटे सुन्दर लड़के को देखकर उसके प्रति ममत्व का भाव रखती हों?  हालांकि इसमें ना सभी पुरुष शामिल हैं ना सभी महिला मगर ये भी तो नहीं कहा जा सकता कि ना ऐसी कोई महिला हो और ना पुरुष?

हां ये ज़रूर है कि हमारा समाज अनूप जलोटा से उम्मीद करता होगा कि वे भजन गाएं, बल्कि इस उम्र में यदि हिमालय पर चले जाएं तो और भी अच्छा अर्थात प्रभु भक्ति के जैसे भजन वह गाते हैं, निजी जीवन में भी वैसे ही बने रहें।

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