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नदी की सियासत पर तारीफों के पुल

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मध्यप्रदेश के मंडला जिले के शहपुर कस्बे में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चर्चित नमामि देवी नर्मदे यात्रा की तारीफ में जो कसीदे गढ़े उन्हें सुन लोगों का दिल भर आया कि लो हमारे यशस्वी सी एम इतने होनहार और विद्वान हैं और एक हम मूढ़ हैं कि सूबे की कानून व्यवस्था को कोसते रहते हैं.

अब जब सारी समस्याएं मां नर्मदा की पूजा, अर्चना, वंदना और आराधना से ही हल होना है तो बेकार के गिले शिकवे क्यों यह तो अधार्मिकता है. इससे बचना चाहिए और अब तो योगी जी तक कह रहे हैं कि शिवराज ने जो इतिहास गढ़ा वह बेमिसाल है अब यू पी में गंगा का उद्धार भी इसी तरह किया जाएगा. इस सेवा यात्रा की तारीफ करने विभिन्न क्षेत्रों की दर्जनों हस्तियां मध्य प्रदेश बुलाई जा चुकी हैं पर आदित्यनाथ की बात अलग हटकर थी वे जिज्ञासा का विषय हैं जिनकी मांग इन दिनों पीएम नरेंद्र मोदी से भी ज्यादा है इसलिए उनके लिए खासतौर से भीड़ इकट्ठा की गई थी.

योगी तारीफ ही करेंगे इसका अंदाजा हर किसी को था पर हद से ज्यादा करेंगे यह कम ही लोगों ने सोचा था. नर्मदा किनारे तारीफों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है अपनी तारीफ सुनने शिवराज सिंह जनता का करोड़ों रुपया फूंक चुके हैं फिर भी उनका जी नहीं भर रहा है तो लग ऐसा रहा है कि जब तक खुद नर्मदा मैया मानव अवतार में प्रकट होकर अपने इस पुत्र को चिर काल तक राज करने का आशीर्वाद नहीं दे देंगी वे मानेंगे भी नहीं. यह और बात है कि आजकल ऐसे चमत्कार होते नहीं अब शिवराज की भक्ति और आस्था यह भी कर डाले तो किसी को खास हैरानी भी नहीं होगी.

आदित्यनाथ योगी हैं, वे बेहतर समझते हैं कि धर्म और पंडे पुजारियों का धंधा नदी पहाड़ के इस खेल से ही फलता फूलता है इसलिए शिवराज ठीक कर रहे हैं और भाजपा की सवर्णों और दलितों को एक साथ साधने की राजनीति के लिए यह जरूरी भी है कि अम्बेडकर जयंती भी धूम धाम से मनाई जाये और परशुराम जयंती भी जिससे चारों वर्णों के लोग खुश रहें. आधा घंटे शिवराज, नर्मदा और मध्य प्रदेश की कल्याणकारी योजनाओं की आरती के बाद योगी ने यू पी की पूर्ववर्ती सरकार को कोसा कि वह बड़ी निकम्मी और भ्रष्टाचारी थी इसलिए अब जनता ने उन्हें चुना. उन्होंने फिर एक जरूरी काम, नरेंद्र मोदी की तारीफ किया जिसके बगैर इन दिनों कोई भी भाजपा जलसा इन दिनों मान्य नहीं होता.

आदित्यनाथ, शिवराज सिंह से जूनियर हैं इस बात का उन्होंने पूरा ध्यान रखा. खुद को शिवराज का छोटा भाई वे अप्रत्यक्ष बताते रहे पर यू पी को एम पी का बड़ा भाई बताया. भाईचारे और तारीफ पर तारीफ का खेल खत्म हुआ तब जानकारों को समझ आया कि आदित्यनाथ अभी शिवराज के मुकाबले कच्चे खिलाड़ी हैं और भाषण कला में भी पिछड़े हैं. ये कमजोरियां ऐसे ही समारोहों से दूर होंगी. महकौशल इलाके में हास परिहास इस बात पर भी हुआ कि यह तो भाजपा के कांग्रेसी करण की शुरुआत है अगर ये दोनों भाई वाकई एक हो गए तो पार्टी के कई दादाओं की मुश्किल हो जाएगी.

अब इस सेवा यात्रा के समापन के लिए 15 मई को नरेंद्र मोदी का आना बांकी है जो योगी की हर गतिविधि पर बेहद बारीक नजर रखे हुये हैं क्योंकि यू पी में वोट उनके नाम पर मिला है, आदित्यनाथ के नाम पर नहीं. उलट इसके एम पी वोट शिवराज के नाम पर डलते हैं और उन्हीं के नाम पर डलते रहें नमामि देवी नर्मदे इसी मुहिम का नतीजा है. एम पी के संक्षिप्त प्रवास से योगी आदित्यनाथ को यह मंत्र जरूर मिल गया है कि कुर्सी पर जमे रहने प्रोपोगेंडा जरूरी है फिर चाहे वे गंगा के नाम पर हो या गाय के नाम पर जिनका मकसद लोगों को उलझाए रखना होता है. अब देखना दिलचस्प होगा कि वे धर्म का कौन सा तत्व चुनते हैं.

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