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Delhi HC notice to Arvind Kejriwal

AAP के लिये राहत भी, आफत भी!

एनटीआई न्यूज ब्यूरो.

LG के फैसले पर राहत

दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी को बड़ी राहत देते हुए पार्टी के दफ्तर को लेकर एलजी अनिल बैजल के एक आदेश को रद्द कर दिया है. उपराज्यपाल बैजल के उस आदेश में उन्होंने आम आदमी पार्टी को उसका दफ्तर खाली करने को कहा था. कोर्ट ने एलजी को उनके फैसले पर पुनर्व‌िचार करने को कहा है.

कोर्ट के इस फैसले पर आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने एक ट्वीट किया जिसे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दोबारा ट्वीट करते हुए लिखा, ‘द‌िल्ली हाइकोर्ट ने AAP के दफ्तर का आवंटन रद्द करने के एलजी के फैसले को पलट दिया है. उपराज्यपाल का फैसला अवैध हो गया है.’

एलजी अनिल बैजल ने 24 अप्रैल 2017 को एक आदेश जारी कर पार्टी के ऑफिस का आवंटन रद्द कर दिया था. शुंगलू समिति की रिपोर्ट में इस दफ़्तर के आवंटन पर सवाल उठाए गए थे और कहा गया था कि ये ज़मीन दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है लिहाजा वह किसी राजनीतिक दल को दफ़्तर/ज़मीन देने के लिए नीति नहीं बना सकती.

केजरीवाल पर मानहानि का जाल

वहीं दूसरी ओर दिल्ली हाईकोर्ट ने वित्त मंत्री अरुण जेटली के दिल्ली जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के आपराधिक मानहानि मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इस मामले में जेटली की तरफ से केजरीवाल पर कथित रूप से झूठा शपथ पत्र देने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर कर कार्रवाई की मांग की गई है. हाईकोर्ट ने इस याचिका पर केजरीवाल को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है.

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने जेटली पर उनके डीडीसीए का अध्यक्ष रहते हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे. जवाब में जेटली ने मुख्यमंत्री के खिलाफ 10 करोड़ रुपए का आपराधिक मामला दर्ज किया था. इस मामले में केजरीवाल के वकील रहे राम जेठमलानी ने 17 मई को सुनवाई के दौरान जेटली को अपमानजनक शब्द कहे थे. इसे लेकर 10 करोड़ राशि का एक और मुकदमा किया गया है. जेठमलानी ने कहा था कि अपशब्द कहने के लिए उनसे मुख्यमंत्री ने कहा था. केजरीवाल ने जेठमलानी के इस बयान के बाद हलफनामा दिया था कि मानहानि के मामले में उन्होंने जेठमलानी को अपमानजनक शब्दों का उपयोग करने के लिए नहीं कहा था. जेटली की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायक और संदीप सेठी ने धारा 340 के तहत दायर याचिका में कहा है कि यह हलफनामा कथित रूप से झूठा है. जेटली के अधिवक्ताओं ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि केजरीवाल की गलत बयानी और हलफनामे में झूठी जानकारी देने के लिए उनपर आपराधिक मामला दर्ज करने की अनुमति दी जाए.

कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल को नोटिस भेजकर चार सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है. इस मामले में अगली सुनवाई 11 दिसंबर को होगी.

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