उत्तराखंड वन सेवा के 71 रेंजरों को बड़ा झटका लगा

सीधी भर्ती के राज्य वन सेवा के करीब 71 रेंजरों को बड़ा झटका लगा है. 2013 से केंद्र सरकार के कर्मचारियों का वेतनमान ले रहे इन सभी रेंजरों से अतिरिक्त पैसे की वसूली के आदेश जारी कर दिए गए हैं. इन रेंजर्स को छह से 14 लाख रुपये तक चुकाने पड़ेंगे. वित्त विभाग ने चार मई को एक आदेश जारी किया है कि एसीपी के रूप में राज्याधीन सेवाओं में अखिल भारतीय सेवा का वेतनमान अनुमन्य नहीं होगा. यानि कि जो राज्य के कर्मचारी जो रेंजर अखिल भारतीय सेवा के वेतनमान ले रहे थे उसे रोक दिया गया.

वन विभाग में रेंजरों को पहले 10, 16 और 26 साल की सेवा पर समयमान वेतनमान दिया जाता था. इसके तहत रेंजरों को तृतीय एसीपी के रूप में 7600 ग्रेड वेतन मिला करता था. गड़बड़ी 2014 से शुरू हुई. तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक डॉक्टर आरबीएस रावत ने शासन के एक आदेश को आधार बनाते हुए  रेंजरों को तृतीय एसीपी के रूप में 7600 की जगह वन सरंक्षक के समान ग्रेड वेतन 8700 देने का आदेश जारी कर दिया था. लेकिन, इसमें तब राज्य वन सेवा और अखिल भारतीय वन सेवा का ध्यान नहीं रखा गया.

तीस जनवरी, 2014 को जारी इस शासनादेश से तब सीधी भर्ती के 52 रेंजरों को एक नवंबर 2013 से ग्रेड वेतन 7600 की जगह ग्रेड वेतन 8700 के तहत वेतनमान दिया जाने लगा. बाद के सालों में इसी आधार पर 19 और रेंजरों को ग्रेड वेतन 8700 दिया गया. इस बीच एसीपी के प्रावधानों में संशोधन के दौरान ये विसंगति पकड़ में आ गई. वित्त विभाग ने चार मई को जारी अपनी एक गाइड लाइन में स्पष्ट लिखा है कि राज्य सेवा के कार्मिकों को अखिल भारतीय सेवा का वेतनमान नहीं दिया जा सकता. इसके बाद प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने इसका पालन करने के निर्देश जारी कर दिए हैं. उन्होंने ऐसे सभी कार्मिकों से इसी माह से वसूली की कार्रवाई शुरू करने को कहा है. यह राशि छह लाख से 14 लाख रुपये तक जाएगी.

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