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सिडकुल 2 के नाम पर नेताओं ने किए 325 करोड़ के वारे—न्यारे

उत्तराखंड में हुक्मरानों के विवेक से उनकी मंशा और दूरदृष्टि का अंदाजा सहज ही लगता रहा है। किसी भी सरकार में विकास के नाम पर लिए गए बड़े फैसलों ने जनता के पैसों की बर्बादी ही की है।

उत्तराखंड में नई औद्योगिक नीति के तहत राज्य के 13 जिलों में उद्योग स्थापित किये जाने थे। पर मामला 4 जिलों में सिमटकर रह गया। जहां उद्योग लगे वहां भी नेताओं ने ठेकेदारों के जरिये अपने ही हित साधने की कोशिश की।

अब सिडकुल फेज-2 का ही उदाहरण लें तो समझना मुश्किल नहीं कि किस मंशा से यहां सवा 3 सौ करोड़ बेवजह बर्बाद कर हुक्मरान अब भी किसी सार संकलन के मूड में नहीं है।

सिडकुल फेज 2 के नाम पर बहे सवा तीन सौ
पांच साल पहले सिडकुल फेज टू के विस्तार के लिए सवा तीन सौ करोड़ रुपए खर्च किए तो गए, लेकिन विकास यहा से कोसों दूर है। जिन सात उद्योगों ने जमीन खरीदी, उनमें से एक ने ही अभी तक कम्पनी लगाई। फेज टू के हालात देखकर तो यही लगता है कि यहां उद्योग लगे या न लगे, सिडकुल को फर्क नहीं पड़ता। सिडकुल ने अपने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए ढांचा तैयार कर काम की इतिश्री कर ली। सडकें खराब हो रही हैं, नाले जगह जगह से क्षतिग्रस्त है। ट्रांसपोर्ट हब भी खाली पड़ा है।

2012 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद जुलाई में उपचुनाव के बाद यहा से विधायक बने सीएम विजय बहुगुणा ने क्षेत्र को सिडकुल के फेज टू की सौगात दी। ‘संपूर्णानंद शिविर खुली जेल’ की करीब 1700 एकड़ भूमि पर औद्योगिक विकास क्षेत्र सिडकुल फेज टू की स्थापना की गयी।

बहुगुणा ने 25 अक्टूबर 2012 को इसका शिलान्यास किया, जिसके बाद सिडकुल ने लगभग सवा तीन सौ करोड़ रुपए ठिकाने लगाने के लिए फेज टू की जमीन में करीब 22 किमी. लम्बी सड़कें, नाले, 12 एकड़ भूमि में ट्रांसपोर्ट हब, सीवर व वाटर लाइनें और तीन गेट का निर्माण किया।

वर्ष 2013 में सबसे पहले ‘गोल्डन इन्फ्राकाॅन’ ने फेज टू में उद्योग लगाने के लिए 75 एकड़ का प्लाॅट खरीदा। उसके बाद 2014 में डीएस ग्रुप ने 270 एकड़ भूमि ली। वर्ष 2015 में पारले एग्रो इंडस्ट्रीज ने 12 एकड़, उसके अगले साल चीन की यो-यो गो कम्पनी ने 27 एकड़, एसडी पाॅलीटेक ने 22 एकड़, संठियों टेक्सटाइल ने 15 एकड़ जमीन खरीदी।

इसके अलावा लघु उद्योग रचना हेचरी ने भी 1200 वर्ग मीटर का प्लाॅट लिया। पारले एग्रो ने तो कम्पनी लगाकर उत्पादन शुरू कर दिया, लेकिन उडीएस ग्रुप एवं गोल्डन इन्फ्राकाॅन जैसी बड़ी कम्पनियों ने तो यहां उद्योग लगाने से ही मना कर दिया। फेज टू को विकसित करने के लिए निर्माण तो जमकर किया गया, लेकिन उद्योगों को स्थापित करने के लिए न ही सरकार और न ही सिडकुल के आला अफसरों ने कोई पैरवी की।

प्लाॅटों की मिट्टी से ऊंची कर दी सड़क
सिडकुल फेज टू में बनाई गई सड़कें ऊंची और प्लाट नीचे हैं।। सिड़कुल द्वारा कार्यदायी कम्पनियों से जब सड़कों का निर्माण कराया गया तो कम्पनियों ने सड़कों के किनारे बने उद्योगों के प्लाटों से ही मिट्टी खोदकर सड़कों में डाली। प्लाटों से मिट्टी खुदने के कारण करीब 4 से 5 फुट सड़कें ऊंची हो गयी है और प्लाट तालाब बने हुए हैं। डीएस ग्रुप ने प्लाटों की हालत देखकर ही यहा उद्योग लगाने से मना कर दिया है।

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