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देश के सबसे बड़े घोटाले में सारे आरोपी बरी ..

देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक माने जाने वाले 2जी घोटाले में आज कोर्ट का फैसला आया है. पटियाला कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा, द्रमुक सांसद कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. इस घोटाले को 1 लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए का बताया गया था.

कोर्ट के फैसले के बाद वकील ने बाहर आकर बताया कि कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं है, दो पक्षों के बीच पैसों का लेन-देन होने का कोई सबूत नहीं है. वकील ने बताया कि जज ने सिर्फ एक ही लाइन में फैसला पढ़ा और कहा कि सभी आरोपियों को बरी किया जाता है.

क्या हुआ कोर्ट में…

वकील के बयान के मुताबिक, सुबह 10.30 बजे कोर्ट की कार्यवाही शुरू हुई लेकिन भीड़ के कारण आरोपी कोर्ट में नहीं आ पाए थे. इसलिए कार्रवाई को थोड़ी देर के लिए टाल दिया गया था. इसके बाद 11 बजे कार्यवाही शुरू हुई, तभी जज ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ सबूत पर्याप्त नहीं हैं, उन्हें बरी किया जाता है. इस दौरान कनिमोझी और ए राजा के समर्थक कोर्ट में मौजूद रहे. फैसला आते ही कोर्ट में तालियां बज उठी.

टू-जी स्पेक्ट्रम घोटाले से जुड़े मामलों पर विशेष रूप से विचार कर रही अदालत ने राजा, कनिमोझी और अन्य सहित सभी आरोपियों को फैसले के लिए गुरुवार उसके सामने हाजिर रहने का निर्देश दिया था. टू-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुनवाई छह साल पहले 2011 में शुरू हुई थी जब अदालत ने 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किये थे. जिन आरोपों में आरोप तय किये गये हैं.

16 मई 2007: डीएमके नेता ए राजा को दूसरी बार दूरसंचार मंत्री नियुक्त किया गया.

25 अक्तूबर 2007: केंद्र सरकार ने मोबाइल सेवाओं के लिए टू-जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की संभावनाओं को खारिज किया.

सितम्बर-अक्तूबर 2008: दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम लाइसेंस दिए गए.

15 नवंबर 2008: केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में खामियां पाईं और दूरसंचार मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की.

21 अक्तूबर 2009: सीबीआई ने टू-जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच के लिए मामला दर्ज किया.

22 अक्तूबर 2009: मामले के सिलसिले में सीबीआई ने दूरसंचार विभाग के कार्यालयों पर छापेमारी की.

17 अक्तूबर 2010: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने दूसरी पीढ़ी के मोबाइल फोन का लाइसेंस देने में दूरसंचार विभाग को कई नीतियों के उल्लंघन का दोषी पाया.

नवंबर 2010: दूरसंचार मंत्री ए राजा को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष ने संसद की कार्यवाही ठप की.

14 नवम्बर 2010: राजा ने इस्तीफा दिया.

15 नवम्बर 2010: मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को दूरसंचार मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया.

नवम्बर 2010: टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच के लिए जेपीसी गठित करने की मांग को लेकर संसद में गतिरोध जारी रहा.

13 दिसम्बर 2010: दूरसंचार विभाग ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवराज वी पाटिल समिति को स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों एवं नीतियों को देखने के लिए अधिसूचित किया. इसे दूरसंचार मंत्री को रिपोर्ट सौंपने को कहा गया.

24 और 25 दिसम्बर 2010: राजा से सीबीआई ने पूछताछ की.

31 जनवरी 2011: राजा से सीबीआई ने तीसरी बार फिर पूछताछ की. एक सदस्यीय पाटिल समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी.

दो फरवरी 2011: टू-जी स्पेक्ट्रम मामले में राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आर के चंदोलिया को सीबीआई ने गिरफ्तार किया.

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