हिमाचल में 24 घंटे में 263 करोड़ का नुकसान

शिमला। प्रदेश भर में भारी बारिश और भूस्खलन से हुए नुकसान और आपदा जैसी स्थिति से निपटने के लिए सीएम जयराम ने आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में पीडब्ल्यूडी, आईपीएच, विद्युत बोर्ड व मौसम विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में सीएम ने कई निर्देश दिए जिसमें जानमाल के नुकसान की भरपाई जल्द करना खासकर महत्व रखता है। सीएम ने बारिश, बाढ़ व भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति जल्द सामान्य करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने विशेषकर राष्ट्रीय उच्च मार्गों और दूसरे व्यस्त सड़कों पर यातायात नियमित करने के लिए कदम उठाने को कहा है।

सीएम ने लोक निर्माण विभाग को भू-स्खलन के कारण प्रभावित सड़कों को बहाल करने के लिए और अधिक मशीनरी लगाने के भी निर्देश दिए। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग को जल आपूर्ति योजनाओं को तुंरत बहाल करने और राज्य विद्युत बोर्ड को तत्काल विद्युत आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए। सीएम के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी हिमाचल की स्थिति से काफी चिंतित हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सभी मंत्री, विधायक और पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे हिमाचल प्रदेश में घटी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए राहत कार्य में जुट जाएं और संकट की इस घड़ी में जनता का सहयोग करें।
कहां-कहां हुआ बारिश से नुकसान
मॉनसून सीजन में हिमाचल में बारिश से अब तक 700 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है जिसमें से बीते 24 घंटे में ही 263 करोड़ रुपये का नुकसान हो गया है। प्रदेश भर में  923 सड़कें भूस्खलन के कारण बाधित हैं। शिमला के उपायुक्त ने बताया कि शिमला शहर में यातायात अवरूद्ध होने के साथ-साथ बिजली आपूर्ति भी कुछ समय के लिए प्रभावित है। भूस्खलन से प्रदेश की दो राष्ट्रीय राजमार्गों सहित 923 सड़कें बाधित रहीं। भूस्खलन से राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (हिन्दुस्तान-तिब्बत) और राष्ट्रीय राजमार्ग-154 (मंडी-पठानकोट) पर यातायात बाधित है।

शिमला जोन में सबसे ज्यादा 353 सड़कें अवरूद्ध हैं। मंडी जोन में 255, हमीरपुर में 164, कांगड़ा में 151 सड़कें बंद हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगभग सभी स्थानों पर बंद सड़कों को खोलने के लिए मशीनरी लगा दी है और अगर आने वाले कुछ समय तक मौसम साफ रहा तो जल्द ही सड़कों पर से मिट्टी और पेड़ों को हटा लिया जाएगा। विभाग के अधिकारियों के अनुसार भूस्खलन से बंद सड़कों के खोलने के लिए 624 मशीनें लगाई गई है। इनमें 484 जेसीबी मशीनें, 97 टिप्पर और 46 डोजर शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक भूस्खलन से लोक निर्माण विभाग को अब तक 460 करोड़ की चपत लग चुकी है।

इसके अलावा शिमला-कालका रोड पर रात से जाम लगा रहा जिसका असर शिमलावासियों पर भी पड़ रहा है। शिमला जिला में दूध-ब्रेड जैसी आवश्यक चीजों की आपूर्ति बाधित हो गई है। चंडीगढ़-शिमला एनएच पर भी वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है।
भारी बारिश से 16 लोगों की मौत
रविवार और सोमवार को केवल दो दिन में 16 लोगों की जानें गईं। जिनमें बिलासपुर, ऊना जिले में एक-एक, हमीरपुर में दो, मंडी में चार और सोलन जिले में आठ व्यक्तियों की मौत हुई है। प्रभावित परिवारों को जिला प्रशासन के जरिए अंतरिम राहत प्रदान की गई है।

शिमला में रिकॉर्ड तोड़ बारिश
पिछले 24 घंटे में हिमाचल में रिकॉर्ड 172.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इससे 11 साल पहले 13 अगस्त को ही शिमला में 122 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इस तरह बारिश ने शिमला में 11 साल पहले का रिकार्ड तोड़ा है और 1901 के बाद ये शिमला में तीसरी रिकॉर्ड तोड़ बारिश है।

बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा असर
प्रदेश भर में भारी बारिश का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। अनहोनी से बचने के लिए प्रदेश सरकार ने सोमवार को लाहौल-स्पीति के अलावा सभी जिलों में छुट्टी के आदेश दिए थे। कुछ जगहों पर जानकारी न होने से छात्र स्कूल के लिए निकल चुके थे। भारी बारिश के बीच वे जैसे-तैसे घर वापस आए। मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी के बाद मंगलवार को भी स्कूलों में छुट्टी के आदेश दिए गए हैं। अब ऊना जिले को छोड़कर बाकी सभी जिलों में 14 अगस्त को भी स्कूल बंद रहे।

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