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25 वर्षीय ग्रेजुएट बना कंपनियों का भाग्य नियंता

“किसी भी काम को शुरू करने के लिए ढेर सारे पैसों की ज़रूरत अब बीते दिनों की बात हो गई है। इंटरनेट का यदि ठीक तरह से इस्तेमाल किया जाये, तो यह शुरुआती महीनों में नकदी की कमी के जोखिम को कम करने में आश्चर्यजनक रूप से मदद कर सकता है। कई उत्साही युवा उद्यमियों की तरह ही, 25 वर्षीय आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र और इंदौर निवासी जयन प्रजापति ने अपने बेडरूम से एक लैपटॉप के साथ अपना स्टार्टअप शुरू किया।”

ग्लेक्स कंसल्टिंग एक ऐसी कंपनी है, जो निर्माण कंपनियों को अनुकरण से निर्माण तक के चक्र के दौरान निर्माण के आंकड़ो को तैयार करना और उन आकंड़ो के प्रबंधन में उनकी सहायता करती है।

जिन दिनों जयन आर्किटेक्चरल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे उन दिनों उन्होंने एक ऐसे मॉड्यूल के बारे में जाना था, जिसे बिल्डिंग इनफॉर्मेशन मॉडलिंग (बीआईएम) कहा जाता है। ये मॉड्यूल एक 3डी मॉडल-आधारित प्रक्रिया है, जो वास्तुकला, इंजीनियरिंग और निर्माण-क्षेत्र के पेशेवरों को अंतदृष्टि और उपकरणों से लैस करती है, जिसकी मदद से वे बिल्डिंग संरचना की योजना, डिजाइन और निर्माण का प्रबंधन और अधिक कुशलता से कर सकें।

इस प्रौद्योगिकी से प्रभावित होकर और वास्तु इंजीनियरिंग के अपने ज्ञान पर आत्मविश्वास के साथ, जयन ने इस ज्ञान-क्षेत्र में ही स्टार्टअप के माध्यम से शुरुआत करने का फैसला किया। वे इस विचार से इतने उत्साहित थे, कि उन्होंने इस सम्बन्ध में BIM समन्वय की मांग करने वाले 9,000 ईमेल भेजे। कुछ परियोजनाओं से जवाब आने के बाद, उन्होंने कुछ लोगों को नियुक्त करने का फैसला किया, जिन्हें बाद में उन्होंने BIM के इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया और 2016 मई में निर्माण अनुसरण के क्षेत्र में सेवाओं के आयात और निर्यात के लिए एक मंच के रूप में ग्लेक्स कंसल्टिंग की शुरुआत की।
अपने शुरूआती दिनों को याद करते हुए जयन बताते हैं, कि उनका पहला ग्राहक एक महीने के लिए ट्रायल बेसिस पर उनके पास आया था और आज उनके पास अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और न्यूजीलैंड तक के क्लाइंट्स हैं

पूरे विश्व में ग्राहक होने के बावजूद, ग्लेक्स कंसल्टिंग के पास अपना खुद का कोई ऑफिस नहीं है। इनके सभी कर्मचारी घर से काम करते हैं, जिन्हें ‘डिजीटल नॉमेड्स’ कहा जाता है। ग्राहकों से प्राप्त बीआईएम अनुबंधों में उन्हें नियोजन, दस्तावेज़ीकरण और अनुसरण करना होता है। पिछले छह महीनों में कंपनी ने हर महीने 40 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि दर्ज की है। जय कहते हैं, कि “मैं अपने परामर्श के लिए मंथली बेसिस पर फीस लेता हूं, जिसके चलते पूरी परियोजना अवधि को महीने में विभाजित किया जाता है।”

ग्लेक्स कंसल्टिंग की इस यात्रा में जयन के लिए सब कुछ आसान नहीं रहा है। शुरू में ऐसा भी हुआ, कि अक्षम परियोजना प्रबंधन के कारण कंपनी को कुछ ग्राहकों को खो देना पड़ा, वंही कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्होंने भुगतान ही नहीं किया, जिससे मूल्य निर्धारण रणनीति सहित कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फिर से काम करना पड़ा।
ग्लेक्स में फिलहाल पांच पूर्णकालिक कर्मचारी हैं, जो विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। लचीले काम के घंटों के कारण कर्मचारियों की उत्पादकता में वृद्धि हुई है, जिसने जयन को विभिन्न शहरों में सह-कार्यस्थल के साथ मिलकर काम करने के लिए अग्रसर किया है। जिसकी मदद से और अधिक लोग अपने होम टाउन से परिवार के साथ रह कर काम कर सकते हैं। जयन कहते हैं,

“मैं अगले दो वर्षों में करीब एक करोड़ रुपये का मुनाफा कमाते हुए ग्लेक्स कंसल्टिंग से उत्पाद अनुसरण और डिजाइन आउटसोर्सिंग जैसी अन्य चीजें जोड़ने की योजना पर काम कर रहा हूं।”

साथ ही जयन ये भी कहते हैं, कि उन्होंने उनके BIM कॉरडिनेटर और मैनेजर्स सफलतापूर्वक त्रुटिहीन निर्माण के लिए आवश्यक विभिन्न प्रक्रियाओं को पूरा कर सकते हैं, जिसमें कॉन्सेप्ट डिजाइन, डीटेल्ड कंस्ट्रक्शन डिजाइन, विश्लेषण – थर्मल, संरचनात्मक; परियोजना प्रबंधन और लोजिस्टिक्स, निर्माण प्रणाली प्रबंधन और संचालन; नवीकरण सिमुलेशन; और विध्वंस योजना व दस्तावेजीकरण शामिल हैं।

ग्लेक्स कंसल्टिंग भारत से BIM कंसलटेंट के रूप में काम करती है। कंस्ट्रक्शन कंपनियों की कंस्ट्रक्शन में मदद करने के लिए पूरे चक्र में आंकड़ो को बनाना और उसके उपयोग के लिए अनुसरण से निर्माण प्रबंधन तक में मदद करती है। BIM के कामों में डिजाइन से लेकर विभिन्न सेवाओं और प्रणालियों के कार्यान्वयन, निर्माण में विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय आदि शामिल है।
बीआईएम सॉफ्टवेयर (जैसे ArchiCAD) डिजाइन परियोजना को एक 3डी मॉडल के माध्यम से निर्माण के लिए काम कर रही टीम की मदद करता है। जयन के अनुसार, पहले ये काम सपाट 2डी चित्रों की तुलना करके या इससे भी बदतर स्थितियों में साइट पर विसंगतियों का पता लगाया जाता था। जयन कहते हैं,

“बीआईएम आभासी डिजाइन और निर्माण की एक वास्तुशिल्प प्रक्रिया है, जो कि प्रौद्योगिकी के गहन उपयोग के माध्यम से वर्चुअल मॉडल के साथ जानकारी को जोड़ती है। हमने निर्माण कंपनियों के साथ अनुबंध किए हैं और विभिन्न निर्माण कंपनियों के लिए एक परामर्शदाता के रूप में कार्य किया है और उनसे चरण-वार शुल्क लिया है। हम अपने अनुबन्ध को हर परियोजना के बाद नवीनीकृत करते हैं। अब तक हमने 18 परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है।”

इस क्षेत्र में एक अन्य स्टार्टअप हैदराबाद स्थित Arth DesignBuild नामक डिजाइन आधारित स्टार्टअप भी शामिल हैं। आईआईटी, खड़गपुर के तीन पूर्व छात्रों द्वारा स्थापित यह स्टार्टअप अवधारणा, डिजाइन, डिजाइन विकास, सलाहकार भागीदारी, निर्माण प्रलेखन और निविदा प्रक्रिया में मदद जैसी सेवाएं प्रदान करता है। ऐमिटी यूनिवर्सिटी और केपीएमजी की एक शोध रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में निर्माण क्षेत्र, देश के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा, क्योंकि यह आर्थिक विकास, औद्योगिकीकरण और शहरीकरण से संचालित और प्रेरित है।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि इस क्षेत्र में निर्मित परिसंपत्तियों और रोजगार सृजन भारत के विकास की संपूर्ण कहानी को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, भारतीय निर्माण क्षेत्र वर्तमान में परियोजनाओं में देरी, लागत में वृद्धि, गुणवत्ता के मुद्दों और वितरण की प्रक्रिया में अन्य अक्षमताओं सहित कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।

कुछ मेट्रो शहरों में किए गए सर्वे के आधार पर यह पता चला है, कि वर्तमान में 22 प्रतिशत उत्तरदाता वर्तमान में बिम का इस्तेमाल कर रहे हैं। 27 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे बीआईएम के बारे में जानते हैं और इसके इस्तेमाल के लिए गंभीरता से विचार कर रहे हैं। जबकि 43 प्रतिशत लोगों को बीआईएम के बारे में पता तो है, लेकिन निकट भविष्य में अपने संगठनों में इसके इस्तेमाल के बारे में अनिश्चित थे। 8 प्रतिशत उत्तरदाता पूरी तरह से बीआईएम से अनजान थे।

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