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शर्म करो सरकार – गोरखपुर में फिर 18 और बच्चों की मौत

(नीरज त्यागी, न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया )

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में नहीं थम रहा बच्चों की मौतों का सिलसिला, 24 घंटे में फिर 18 बच्चे मरे।

गोरखपुर. बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में बीते 24 घंटों में 18 और बच्चों की मौत हो गई। पिछले चार दिनों में 79 बच्चों की मौत हो चुकी है। मरने वाले बच्चों में 13 इन्सेफेलाइटिस से पीड़ित थे जबकि 36 नवजात शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत के बाद बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मेडिकल कॉलेज का दौरा कर वस्तुस्थिति जानी। देर शाम कमिश्नर अनिल कुमार व डीएम राजीव रौतेला भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। उधर, मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने बताया कि इनदिनों मेडिकल कॉलेज में काफी संख्या में बच्चे भर्ती हो रहे जिनकी स्थिति काफी नाजुक रह रही। अस्पताल में दवा या अन्य संसाधनों की कमी नहीं है बल्कि ये बच्चे बेहद नाजुक हाल के पहुंच रहे जिनको बचाने का काफी प्रयास किया जा रहा पर बहुत सारे बच्चों को बचा नहीं पाया जा रहा।

बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज प्रशासन से बुधवार को मिली जानकारी के अनुसार बीते 24 घंटों में एनआईसीयू में 11 नवजात बच्चों में दम तोड़ दिया। जबकि पीडियाट्रिक्स आईसीयू में 7 मौतें हुईं हैं। मरने वालों में 2 इन्सेफेलाइटिस पीड़ित मासूम भी शामिल थे।

इस तरह बीते चार दिनों में 79 बच्चे असमय काल कवलित हो चुके हैं। मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक 24 घंटे में इन्सेफेलाइटिस से 4 मासूमों की मौत हो गई। जबकि रविवार व सोमवार को सात बच्चों की मौत इन्सेफेलाइटिस से हो गई। इसके अलावा पिछले चार दिनों में मेडिकल कॉलेज के नियोनेटल वार्ड में 36 बच्चों की मौत हो चुकी है। रविवार व सोमवार को 15 बच्चों की मौत इस वार्ड में हुई जबकि 21 बच्चों की मौत बीते 48 घंटों में हुई। अन्य बीमारियों से चार दिनों में 30 बच्चे काल के गाल में चले गए। इसमें रविवार व सोमवार को 14 व मंगलवार को 11 और बुधवार को पांच बच्चों की मौत हुई है।

बच्चों की मौत पर एसआईसी रमाशंकर शुक्ला बोले, ये सामान्य बात है

एनआईसीयू में हो रही मौतों पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध नेहरू चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमाशंकर शुक्ला कहते हैं कि सामान्य तौर पर हर 1000 बच्चों में एक साल पूरा करते-करते करीब 120 की मौत हो जाती है। मेडिकल कॉलेज में जो नवजात आते हैं वह बेहद क्रिटिकल स्थिति में होते हैं। ये आंकड़ा सामान्य बात है। अब कोई गंभीर होता है तो सीधे मेडिकल कॉलेज भागता है इसलिए अस्पतालों में मौतों की संख्या बढ़ रही। वह कहते हैं कि नियोनेटल आईसीयू में कहीं कोई कमी नहीं है। वह संक्रमण की बात से भी इंकार करते हैं।

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