16-year-old Nasir turns out to take on Google-Tesla collision

गूगल-टेस्‍ला से टक्‍कर लेने चला 16 साल का नासिर

बेंगलूरू स्थित इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ साइंस (IIs) के परिसर में अपनेआप चलने वाले एक कॉमर्शियल व्‍हीकल का प्रोटोटाइप रखा है। पहली नजर में बेहद आम दिखने वाला यह प्रोटोटाइप किसी भी वाहन के सामान्‍य प्रोटोटाइप की तरह दिखता है। 54 वर्षीय वी विजय, 39 साल के सौरभ चंद्रा के साथ 16 साल का साद नासिर इस प्रोटोटाइप के जरिए टेस्‍ला और गूगल जैसी कंपनियों को एक साथ टक्‍कर देना चाहता है। इन तीनों ने मिलकर Ati मोटर्स के नाम से कंपनी शुरू की है। यहां 30 लोगों का स्‍टॉफ मिलकर एक ऐसा कॉमर्शियल व्‍हीकल बनाने की कोशिश कर रहा है, जो एक चार्जिंग में 8 घंटे तक आउटपुट दे और चलाने के लिए ड्राइवर की भी जरूरत नहीं पड़े।

टेस्‍ला और गूगल भी कर रहे हैं प्रयोग 
ड्राइवर लेस व्‍हीकल पर टेस्‍ला मोटर्स और गूगल भी काम कर रही हैं। इससे जुड़ी रिसर्च पर पानी की तरह पैसा बहा रही हैं। Ati मोटर्स के पास इतनी फंडिंग नहीं है। हालांकि अगर यह तिकड़ी कामयाब रही तो निश्चित तौर पर भारत में आंत्रप्रेन्‍योरशिप, स्‍टार्टअप और इनोवेशन की एक नई कहानी जरूर लिख देगी। यह टीम ऐसा वाहन बनाने की कोशिश में है, जो टेस्‍ला की तरह बैट्री चले और गूगल की तरह बिना ड्राइवर की हो।

3 पार्टनर में सबसे ज्‍यादा ध्‍यान साद ही खींचते हैं 
यूं तो Ati मोटर्स को विजय, चंद्रा और साद ने मिलकर शुरू किया है। हालांकि मात्र 16 साल उम्र होने के चलते सबसे ज्‍यादा ध्‍यान साद ही अपनी ओर खींचते हैं। साद स्‍टैनफोर्ड से सर्टिफाइड विज किड रहे हैं। उन्‍होंने आंत्रप्रेन्‍योर बनने के लिए अपना स्‍कूल तक छोड़ दिया। विनय के मुताबिक, वह साद को तब से जानते हैं जब वह मात्र 11 साल के थे। तक से दोनों हफ्ते में एक बार जरूर मिलते रहे हैं।

मात्र 30 मिनट में तैयार कर दिया कोड 
विनय साद की विलक्षण प्रतिभा के कायल हैं। वह बताते हैं कि कैसे साद ने एक ऑटोनॉमस (अपने आप चलने वाले) व्‍हीकल को चलाने के लिए जरूरी एग्‍लोरिदम का कोड मात्र 30 मिनट में तैयार किया। चंद्रा के मुताबिक, इस प्रोजेक्‍ट से जुड़ी हर गतिविधि में साद की भागीदारी होती है।

सबसे अलग होगी शेरपा  
Ati मोटर्ट की टीम ने फिलहाल अपने इस ड्रीम व्‍हीकल का नाम ‘शेरपा’ रखा है। एवरेस्‍ट की चढ़ाई के के रास्‍ते में सामान लेकर पर्वतारोहितयों की मदद करने वाले शेरपा जाति के लोगों से प्रभावित होकर टीम ने इसका यह नाम रखा है। विनय के मुताबिक, इस प्रोजेक्‍ट के लिए इंजन से लेकर बैट्री सिस्‍टम तक टीम खुद तैयार कर रही है। यही कारण है कि इसमें वक्‍त लग रहा है। हालांकि यह प्रोजेक्‍ट सफल हुआ तो साद भारत के मार्क जुगरबर्ग जरूर कहे जाएंगे। यह पूरी तरह से भारतीय ऑटोमेटेड बैट्री चालित कार होगी।

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