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जंग के दौरान इन 13 हाइवे पर गरजेंगे फाइटर प्लेन

(NTI न्यूज़ ब्यूरो, नेशनल)
जंग के हालात फिलहाल तो नहीं लेकिन सीमा पर जिस तरह से दुश्मन हर दिन कुछ ना कुछ ऐसा कर रहा है जिससे सेना और सरकार को कब क्या फैसला लेना पड़े कुछ नहीं कहा जा सकता. ऐसे में किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार रहना जरुरी है.  इसी के मद्देनजर देश की सुरक्षा को लेकर सरकार ने एक और कदम आगे बढाया है. जिसमें देश के 13 नेशनल हाईवे की पहचान की गई है. जिन्हे फाइटर प्लेन की लैंडिंग और टेकऑफ के लिए रन-वे के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. 21 मई 2015 को जब आगरा एक्सप्रेस वे पर मिराज 2000 की लैंडिंग कराई गई. हालांकि ऐन मौके पर हर्डल आने से लैंडिंग नहीं हो पाई और फाइटर पायलट ने प्लेन को रनवे से छूते हुए टेक ऑफ कर लिया
लेकिन ठीक डेढ साल बाद आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर एक के बाद एक हाईवे पर 6 लड़ाकू विमानों ने लैंडिंग की. खबर है कि केन्द्र सरकार ने उन 13 हाईवे की पहचान कर ली है जिस पर सेना अपने फाइटर प्लेन की लैंडिग इसी तरह करा सकेगी. रक्षा मंत्रालय और सडक परिवहन मंत्रालय में आपसी बातचीत और सहमति के बाद पहले चरण में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर इन 13 हाईवे की पहचान की गई है. साथ ही इन्हे फाइटर प्लेन की लैडिंग के हिसाब से विकसित करने का फैसला हुआ है.
पहला है गुजरात में मौजुद एनएच – 947 पर द्वारका-देवालिया-मालिया रोड, दूसरा है ओडिशा के एनएच-5 के झारपोखरिया-भारीपाडा-बालासोर, तीसरा है चेन्नई के एनएच-210 पर कोडियक्कराई से रामनाथापुरम, चौथा है तमिलनाडू के एनएच- 66 पर पुदूचेरी से त्रिवेन्द्रम, पाचंव भी तमिलनाडू के ही एनएच-45 पर उलुंदरपेट से पादलौर, छठा जो कि बेहद महत्वपूर्ण है वो है जम्मू-कश्मीर के एनएच-1ए पर श्रीनगर से बनिहाल के बीच, सातवां  राजस्थान में एनएच-15 पर जैसलमेर से बाडमेर के बीच, आंठवा भी राजस्थान में ही एनएच 15 पर फलौदी से जैसलमेर के बीच, नौवा पश्चिम बंगाल में खडगपुर – क्योझर के बीच, दसवां आध्रप्रदेश में नेल्लोर और ओंगोले के बीच, ग्यारहवा आंध्रप्रदेश में ओंगोले से चिकलूरिपेट के बीच, बारहंवा उत्तरप्रदेश में लखनऊ-बलिया के बीच और तेरहवां लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे जो बन चुका है.
आगरा एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 302 किमी है और ये देश का अब तक का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे है. बता दे कि लड़ाकू विमानों की लैंडिंग के लिए लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर 3 किमी लंबी स्ट्रिप बनाई गई थी और कमोवेश ऐसी ही स्ट्रिप अब देश के 13 हाईवे पर बनाई जाएंगी. ये फैसला साल 2016 में उस वक्त हुआ जब प्रधानमंत्री मोदी इंफ्रास्ट्रक्चर रिव्यू मिटिंग ले रहे थे. उस बैठक में फैसला लिया गया की भारत में ऐसी सड़के होनी चाहिए जिस पर वक्त आने पर फाइटर प्लेन की लैंडिग और टेक ऑफ हो सके. गुजरात से लेकर राजस्थान और पंजाब होते हुए जम्मू कश्मीर तक पाकिस्तान की सीमा से सटी है भारत की सीमा. जिसकी कुल लंबाई 3323 किलोमीटर है. इधर चीन है, जो जम्मू-कश्मीर से हिमाचल, उत्तराखंड होते हुए सिक्किम और अरूणाचल प्रदेश तक जाती है जिसकी कुल लंबाई 3488 किलोमीटर है. नीचे जो समुद्री सीमाएं है वो भी तीनो तरफ से खुली हुई हैं.

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