देहरादून की 129 बस्तियां 3 माह में हटाने के आदेश 

उत्तराखंड सरकार की ओर से बस्तियों के लिए लाए गए अध्यादेश से राहत के बाद एक बार फिर से बस्तियों पर संकट आन पड़ा है। नैनीताल हाईकोर्ट ने देहरादून में नदी किनारे बस्तियों को तीन माह के भीतर हटाने के आदेश दे दिए हैं। देहरादून में रिस्पना और बिंदाल नदी किनारे 129 बस्तियां हैं। नगर निगम के सर्वे के मुताबिक, यहां करीब चालीस हजार भवन हैं। जानकारी के मुताबिक, 129 बस्तियों में करीब दो लाख की आबादी है। कुछ माह पहले नैनीताल हाईकोर्ट ने मनमोहन लखेड़ा की याचिका पर देहरादून में सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने के साथ ही रिस्पना किनारे अतिक्रमण को भी हटाने के आदेश दिए थे। इस बीच कुछ लोग अतिक्रमण हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सड़कों पर अतिक्रमण हटाने का काम जारी रहे, जबकि बाकी अतिक्रमण को लेकर संबंधित लोगों को नोटिस देकर उनका पक्ष सुना जाए। ऐसे में नगर निगम ने नदी किनारे की बस्तियों को नोटिस भेज दिए। इसी बीच राज्य सरकार बस्तियों को बचाने के लिए तीन साल का अध्यादेश लेकर आ गई और बस्तियों को हटाने की कार्रवाई रोक दी गई। लेकिन, एक बार फिर नैनीताल हाईकोर्ट ने देहरादून में नदी किनारे बस्तियों को तीन माह में हटाने के आदेश दे दिए हैं।

सरकार जुलाई में लाई थी अध्यादेश
मलिन बस्तियों को हटाने से पहले नोटिस भेजने के चलते लोगों में खलबली मच गई थी। सत्ताधारी पार्टी के विधायक भी मलिन बस्तियों को हटाने के खिलाफ आए गए। विपक्षी दलों के नेता भी बस्तियों को बचाने की मुहिम छेड़ने लगे। ऐसे में भारी दबाव के चलते राज्य सरकार जुलाई माह में बस्तियों को बचाने को अध्यादेश ले आई। इसके तहत बस्तियों को हटाने में तीन साल की रोक रहेगी। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार का  रुख देखना होगा।

10,700 अतिक्रमण चिह्नित
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 में कुछ विभागों की ओर से किए गए सर्वे में 10,700 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। राज्य सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश से पहले देहरादून नगर निगम ने सैकड़ों लोगों को नोटिस भी भेजे दिए थे। बताते चलें कि वर्ष 2005 में नगर निगम, सिंचाई विभाग और प्रशासन ने रिस्पना और बिंदाल नदी का सर्वे किया था।

देहरादून में खुद अतिक्रमण हटाएंगे सरकारी महकमे
नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से बस्तियों को नोटिस देकर उनका पक्ष जानने के बाद तीन सप्ताह में कार्रवाई करने को कहा गया था। राज्य सरकार की ओर से अध्यादेश लाने से पहले नगर निगम सुप्रीम कोर्ट गया था। यहां कोर्ट ने आदेश दिया कि जिस विभाग की जमीन पर अतिक्रमण होंगे,
वही विभाग अवैध कब्जे हटवाएंगे।

रिस्पना टैक्सी स्टैंड पर भी मंडराया संकट
देहरादून। हाईकोर्ट ने नदी किनारे वाहन पार्किंग हटाने का आदेश दिया है। शहर की कई पार्किंग इस आदेश की जद में आ रही हैं। रिस्पना नदी किनारे दून गढ़वाल टैक्सी यूनियन की सालों पुरानी पार्किंग है। यहां से कुमाऊं के साथ ही गढ़वाल के उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, ऋषिकेश, हरिद्वार और कोटद्वार के लिए टैक्सियों का संचालन होता है। इसके अलावा सहस्रधारा रोड पर पर्यटन विभाग बड़ी पार्किंग बना रहा है, जो नदी किनारे बन रही है। इस पार्किंग स्थल का आधा काम पूरा हो चुका है। गुच्चूपानी की पार्किंग भी नदी किनारे है। यदि हाईकोर्ट के आदेश पर अमल हुआ तो शहर के कई प्राइवेट पार्किंग स्थल साफ हो जाएंगे।

पूर्व में भेजे नोटिस में यह लिखा गया था…
राज्य सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश से पहले नगर निगम ने बस्तियों में बने भवनों को जो नोटिस भेजे थे, उसमें यह पूछा जा रहा था कि कब से कब्जा है। संबंधित भवन स्वामी से भूमि के अभिलेख की सूचना मांगी थी।

नदी की चौड़ाई तय नहीं
रिस्पना और बिंदाल नदी क्षेत्र में हुए अतिक्रमण को लेकर अभी तक नदी की चौड़ाई तय नहीं हुई है। नगर निगम की बोर्ड बैठक में कई बार तय हुआ था कि सरकार पहले नदियों की चौड़ाई तय करे, लेकिन आज तक यह साफ नहीं हुआ है कि रिस्पना और बिंदाल की वास्तविक चौड़ाई कितनी है।

अभी बस्तियों के सात हजार भवनों पर ही लगा है टैक्स
नगर निगम क्षेत्र के तहत 129 मलिन बस्तियों में कुल चालीस हजार भवनों में से अभी तक सात हजार मकानों पर ही हाउस टैक्स लगा है। बीते कुछ माह से बस्तियों पर टैक्स लगाने का काम बंद है। हाईकोर्ट के आदेश के चलते एक बार फिर से बस्तियों पर हाउस टैक्स लगाने का मामला अधर में लटक सकता है।

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